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शुगर (मधुमेह) का नियंत्रण : लक्षण, रोकथाम – Diabetes 2023

शुगर

शुगर, या मधुमेह, एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की ऊर्जा निर्माण के लिए इंसुलिन नामक हार्मोन का सही मात्रा में नहीं बनता है या उसका सही तरीके से उपयोग नहीं होता है। यह एक गंभीर बीमारी है जो अगर संभाला नहीं जाता, तो शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है।

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कारण:

आनुवांछिक कारण : शुगर

आनुवांछिक गुणकों में परिवर्तन, जो परिवार में मधुमेह के प्रति अधिक संवेदनशीलता बढ़ा सकते हैं।

जीवनशैली और खानपान की गलत आदतें, जैसे कि अधिक मिठा खाना और कम व्यायाम करना।

आमाशय के बीमारियाँ:

पैंक्रिएस की कमी या उसका सही तरीके से काम नहीं करना, जिससे इंसुलिन का उत्पादन कम होता है।

आयु और वजन:

बढ़ती आयु और अधिमासिक वजन के साथ मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।

लक्षण:

अत्यधिक प्यास और भूख:

शुगर के मरीजों में अक्सर प्यास की अत्यधिक भारी लाल शरीर हो सकता है।

वजन कमी:

शरीर खो देने के बावजूद, मधुमेह मरीज अक्सर वजन कम कर सकते हैं।

अधिक मूत्राशय का आवागमन:

अधिक मधुमेह के कारण मूत्र में शुगर होने के कारण मूत्राशय का आवागमन बढ़ सकता है।

रोकथाम: शुगर

स्वस्थ आहार:

कम मिठा और अधिक फाइबर वाले आहार का सेवन करें।

नियमित व्यायाम:

योग और व्यायाम करना मधुमेह को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है।

दवाएँ और इंसुलिन थेरेपी:

चिकित्सक के परामर्श के बाद निर्धारित दवाओं का सेवन करें और जरूरत पर इंसुलिन लें।

नियमित जाँच और निगरानी:

रोजगार और ह्यापीलिन लेवल्स की निगरानी रखें और नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह लें।

आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद में मधुमेह के उपचार के लिए कई प्रकार के आहार, व्यायाम, और औषधियाँ सुझाई जाती हैं। यहां कुछ आयुर्वेदिक उपचार हैं:

कर्णपूरण:

त्रिफला, गुड़मार, और नीम की पत्तियों का कर्णपूरण मधुमेह के उपचार में उपयुक्त हो सकता है।

योगासन और प्राणायाम:

योग और प्राणायाम, जैसे कि वज्रासन, पश्चिमोत्तानासन, भ्रामरी प्राणायाम, मधुमेह के नियंत्रण में मदद कर सकते हैं।

आयुर्वेदिक औषधियाँ:

गुड़मार, त्रिफला, शिलाजीत, विजयसार, आमला, बिल्व, करेला, गुग्गुल, जम्बुल बीज, आदि कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँ हैं जो मधुमेह के उपचार में प्रयोग हो सकती हैं।

पंचकर्म चिकित्सा:

विरेचन, वमन, नास्य, बस्ति, और रक्तमोक्ष की पंचकर्म चिकित्सा का अभ्यास मधुमेह के इलाज में किया जा सकता है।

आहार और जीवनशैली:

ताजगी से भरपूर और सर्दी, गर्मी, बर्षा के अनुसार आहार लेना, समय पर भोजन करना, और व्यायाम को नियमित रूप से करना आहारशैली और जीवनशैली में सुधार कर सकता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श:

आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से सही और सटीक उपचार योजना बनवाएं, जिसमें आपकी प्रकृति, दोष, और रोग की स्थिति को ध्यान में रखा जाए।

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